दुनिया पेच पतंग का
दिल ओर गुबारा – कब तूट जाये किसको पता
मंज़िल मिले या न मिले– कब सासे छूट जाये किसको पता?
दिल ओर………
पानी से पथ्थर चूर होते देखा-अपनी तकदीर दूर होते देखा!
क्या अजीब खेल खुदका- कब किस्मत रुठ जाय किसको पता
दिल और……..
जमी आसमा कभी मिलते नही – बिना पानी के फूल खिलेनही
लूट लेने दे मस्ती मेरे खुदा – कब लहेर हट जाये किसको पता
दिल और…….
खुदा तू उठाएगा तो उठ जाउगा –खुदा तू मिटायेगा तो मिट जाउ गा
“जगाणी” दुनिया पेच पतंग का – कब डोर कट जाये किसको पता
दिल और…….
"मेजर जगाणी"
સત્ય મેવ જયતે
Note☡
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