महोब्बत की लहरों में डूबा दिया तुमने सनम ।
बहोत गुरुर था हमको जूका दिया तुमने सनम ।
महोबत की......
तेरी दुआओ की वजहसे रहमत बरसी खुदाकी
सहरा में भी चमन बना दिया तुमने सनम
महोबत की......
ये चाँद ये राते ये नशीली आंखे तेरी
मेरे सुने आंगनको सजा दिया तुमने सनम
महोबत की......
ए दोस्त मेरे क्या खूबी है तेरे हुस्न में
ईमान फरिश्तो का डगमगा दिया तुमने सनम
महोबत की......
बहोत गुरुर था हमको जूका दिया तुमने सनम ।
महोबत की......
तेरी दुआओ की वजहसे रहमत बरसी खुदाकी
सहरा में भी चमन बना दिया तुमने सनम
महोबत की......
ये चाँद ये राते ये नशीली आंखे तेरी
मेरे सुने आंगनको सजा दिया तुमने सनम
महोबत की......
ए दोस्त मेरे क्या खूबी है तेरे हुस्न में
ईमान फरिश्तो का डगमगा दिया तुमने सनम
महोबत की......

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