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जरूर

મેજર જગાણી, mejar jagani, hindi ghazal, lattest hindi ghazal
कितने दिलो की उड़ी खाक, कोइ तो बात जरूर है ।
मेरे खुदा मुजको बचना, ये इश्क की आग जरूर है ।।
कितने दिलो की.......

यार मेरे ख्वाबो में मिलना, हक़ीक़त में नज़रे चुराना ।
हर लम्हा हमको तड़पना, ये इश्क की जफ़ा जरूर है ।।
कितने दिलो की.......

दिल की बाते दिल मे रहने दो, इस राज़ को राज़ रहने दो ।
वरना हमको जीने न देगा जमाना, ये इश्क की खता जरूर है ।।
कितने दिलो की.......

हर दम याद आती है तुम्हारी, ये ग़ज़ल बताती है हमारी ।
पलको से आंसूओ का गिरना, ये इश्क की वफ़ा जरूर है ।।
कितने दिलो की.......

जलने से फिक्र परवाना क्या करे, मरने की फिक्र दीवाना क्या करे ।
आखरी लब्ज़ हमारे सीनेसे लगा लेना, ये इश्क की अदा जरूर है ।।

कितने दिलो की.......

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