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खुदा तेरी बंदगी में

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बिगड़े हुवे दिन मेरे, फिरसे सवारना चाहता हु में,
खुदा तेरी बंदगी में, जिंदगी गुज़रना चाहता हु में।
बिगड़े हुवे दिन मेरे, फिरसे सवारना चाहता हु में।।

उम्र काटने के लिए, खुदा तेरा सहारा काफी हय,
अगर मरजी हय तेरी, तो तुमको पाना चाहता हु में।
बिगड़े हुवे दिन मेरे, फिरसे सवारना चाहता हु में।।

कोई तो आके पूछो जरा, कितने ज़ख्म दिए ज़माने ने,
जो बीती हय दिलपे मेरे, उसे भूलना चाहता हु में।
बिगड़े हुवे दिन मेरे, फिरसे सवारना चाहता हु में।।

देखी तेरी निगाहों में, मालिक रहेमत इतनी गहेरी,
आखरी साँसे मेरी, इनमे डूबाना चाहता हु में।
बिगड़े हुवे दिन मेरे, फिरसे सवारना चाहता हु में।।

जिसने बनाई ये दुनिया "जगाणी" वो नही है गाफिल,
उंगली अपने लबो पे, अब दबाना चाहता हु में।
बिगड़े हुवे दिन मेरे, फिरसे सवारना चाहता हु में।।

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