तपस्यामे शिवजी तपे,
फल की आस करे दुनिया।
विष निकले तो शिवजी पिये,
अमृत की आश करे दुनिया।
दो नयन से देखे दुनिया,
शिव आंख तुम्हारी तीसरी।
सागर मंथन हुआ जगाणी,
सोचो बात बन गई गहरी।
चौदा रतन जग ले गया,
माया लगी सबको प्यारी।
अब तेरे बिना विष कोन पिएं शिवलहेरी।
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